सफ़र : तब से अब तक
प्रणाम मित्रों, कहानी की भूमिका में जो कुछ लिखना था में लिख चूका हूँ. अब में चाहता हूँ कि अपने बारे में लिखू. सुधी पाठकों से एक बार फिर निवेदन है कि इसे सिर्फ एक बेतरतीब कहानी समझकर ही पढ़े. मैंने कहानी को खंडो में बाँट दिया है, ताकि पढ़ने में आसानी रहे. टारो टारो मटोड़ो ये शब्द उस बच्चे के हैं जिसकी उम्र अभी महज़ 3 वर्ष है. जो तुतलाते हुए बोलता है, इसलिए घर पर आने वाला हर व्यक्ति उससे एक ही सवाल करता है कि टारो टारो टई है और वो कहता है कि मटोड़ो. यह बात 1993 की है, जब मै 3 वर्ष का था. प्रमाण पत्रों के हिसाब से मैरा जन्म 1990 में हुआ. परिवार वाले कहते है कि बचपन में कुछ ज्यादा ही होशियार था (बाद में नहीं रहा) इसलिए विद्यालय में दाखिला जल्दी दिलवा दिया और वहाँ पर जो हेडमास्टर साहब ने जन्म दिनांक लिखी वही हमेशा के लिए रूढ़ हों गई. माँ पांचवी पास है और पिताजी उस समय शायद दसवीं पास रहे होंगे. परिवार में दादा-दादी से छह संताने है जिनमे सबसे बड़ी मेरी भुवा के बाद मैरे प...