एक शुरुआत.......

प्रणाम मित्रों,
                  लिखना इतना आसान नहीं हैं ,
                  जितना आप समझते हैं,
                  क्योंकि लिखी हुई चीज़े याद रहती है 
                  जबकि हर कोई भूल जाना चाहता है अतीत को 
                  अतीत में यादें बसती है, 
                  यादें अक्सर याद रहती हैं,
                  मुझे भी याद है अतीत की एक याद 
                  जिस याद में वो बसती है 
                  वो...................एक याद 
  

                                 ये पंक्तियाँ मैने 2013 में लिखी थी. लिखना में हमेशा से चाहता था पर ऐसा कोई मंच नहीं मिल पा रहा था जिससे में अपने विचारों को अभिव्यक्त कर पाता. वैसे सोशल मिडिया एक अच्छा माध्यम हो सकता था, पर मैने वहां कभी लिखने की कोशिश नहीं की. और सच कहूँ तो मेरे पास भाषा की समझ नहीं थी,और ना ही इतना समय की मै कुछ ढंग का सोच पाता. आज दिनांक 18/07/2017 से मैने इस ब्लॉग के माध्यम से लिखना शुरू किया है. मै दावा तो नहीं करता कि मेरा लिखा आपको पसन्द आये क्योंकि इतनी समझ अभी भी मेरे पास नहीं है, पर किसी ने कहा है कि "करत - करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान". ऊपर जिस कविता की पंक्तियाँ मैने लिखी है वो अधूरी है, समय मिलने पर पूरी करने की कोशिश करूँगा. 
      

आज के लिए इतना ही..........शुक्रिया.   
                        

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