स्पष्टीकरण...😎

प्रणाम मित्रों,
                 इस ब्लॉग के माध्यम से मै आपको अपने जीवन से जुड़े कुछ खट्टे कुछ मीठे, कुछ रंगीन कुछ रूमानी किस्सों, और कुछ हेरतंगेज कारनामों से रूबरू करवाना चाहता हूँ. ऐसे किस्से जो हर व्यक्ति के जीवन में घटित नहीं होते. हर व्यक्ति का अपना नसीब होता है. मेरे नसीब ने मुझे जरूरत से ज्यादा ही दिया. जीवन में जिस मोड़ पर जिसकी जरूरत थी वो मिलता रहा. मेरी उम्र के 25 बसंत बीत चुके है, उम्र के इस पड़ाव पर पहुँचने तक जो यादें जुड़ी है उन्हें ही शब्दबद्ध कर रहा हूँ. आशा है इसे पढकर आप मेरे बारे में कोई राय कायम कर पायेंगे जो कि आप करेंगे ही.
                एक बात और जो मै पहले ही स्पष्ट कर देना चाहता हूँ वो यह कि यह आत्मकथा बिलकुल भी नहीं है. क्योंकि आत्मकथा महान व्यक्तियों के द्वारा लिखी जाती है, जिन्होंने अपने जीवन में कोई महान कार्य किये हों एवं जिनकी कहानी से समाज कोई प्रेरणा ले सकें. मै ना तो कोई महान व्यक्ति हूँ और ना ही मैंने अपने जीवन में कोई महान कार्य किये हैं और ना ही मेरी इस कहानी में प्रेरणा लेने जैसा कुछ है. इसलिए प्रबुद्ध पाठकों से निवेदन है कि आप इस कहानी को एक आवारे लड़के की कहानी मानकर ही पढ़े. मैंने अपने आपको आवारें की उपाधि से क्यों नवाज़ा है, ये आप जब आगे पढेंगे तो स्वयं समझ जायेंगे. 

महत्वपूर्ण नोट :-  जैसा कि मै पहले ही बता चूका हूँ कि भाषा की समझ मुझमें इतनी नहीं है और व्याकरण की तो न के बराबर. इसलिए जहाँ भी भाषा संबंधी या व्याकरण संबंधी अशुद्धियाँ आपको मिले तो ये समझ के माफ़ कीजिएगा की एक आवारा इससे अच्छा क्या लिखेगा. एक बात और, लिखने के लिए सोचने की जरूरत होती है और सोचने के लिए समय चाहिए. इसलिए जैसे-जैसे समय मिलता रहेगा वैसे-वैसे कहानी को आगे बढ़ाता रहूँगा.


शुक्रिया..........

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