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संघर्ष

  कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता.... आदरणीय गोपालदास नीरज ने जब ये पंक्तियाँ लिखी होगी तो न जाना उनके जहन में क्या रहा होगा. लेकिन आज की युवा पीढ़ी जिसके जहन में निराशा घर कर गई है, उसके लिए ये कविता आशा का नया संचार करती है और जीवन में निरंतर प्रयासरत रहने की शिक्षा देती है. वर्तमान समय में हर नोजवान का सपना रहता है कि वह कोई न कोई सरकारी नोकरी प्राप्त कर ले जिससे उसके जीवन में दाल-रोटी का जुगाड़ हों सकें.(दाल-रोटी इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि सरकारी नोकरी से टाटा, अम्बानी या बिडला बनने से तो रहे) इसी लक्ष्य के साथ वह संघर्ष करता है और लाखों बेरोजगारों की भीड़ में शामिल होता है. सतत एवं निरंतर प्रयास के बलबूते वह अपने लक्ष्य को पाने में सफल होता हैं. लेकिन जो प्रतियोगी असफल हों गये उनका क्या ? उन्ही को जहन में रखते हुए अपने विचार साझा कर रहा हूँ. जब प्रतियोगी असफल होता है तो सबसे पहले वह कुंठा और अवसाद का शिकार होता है, उसे यह लगता है कि दुनिया लुट गई, इस दुनिया में आना निरर्थक हों गया. इस किंकर्तव्यविमूढ़ और कशमकश की स्थिति में वह बिना कुछ सोचे विचारे अपने-स्वजनों का ख़याल कि...

सफर खजुराहों का....🚆

प्रणाम मित्रों ...🙏             एक लंबे अरसे के बाद आपसे मुखातिब होने का अवसर मिल रहा है। असल में ज़िंदगी उलझी पड़ी थी कि कोई ढंग का मुकाम मिले, जिससे रोज़ी-रोटी का जुगाड़ हो सके। अब कही जाके वरिष्ठ अध्यापक का दर्जा हासिल हो सका। आज के समय में बेरोजगारों की भीड़ से अलग निकलना काफी मशक्कत भरा काम है। असम्भव नहीं है, पर सम्भव कोई कोई ही कर पाता है।               खैर तो जैसा कि शीर्षक से आपकों लग रहा होगा कि खजुराहो, जो कि एक बहुत ही इतिहास प्रसिद्ध स्थल है, मैं आपको वहाँ का यात्रा-वृत्तांत सुनाने वाला हुँ, तो जनाब आप बिल्कुल गलत अनुमान लगा रहे हैं। असल मे मैं आपको सुना रहा हूँ दास्ता उस सफर की जो हमने खजुराहों जो कि एक लोहपदगामिनी का नाम है जो उदयपुर से खजुराहों के बीच चलती है, से तय किया । वैसे मैने इसमें कई बार सफर किया लेकिन खजुराहों जाने के लिए नहीं बल्कि जयपुर की यात्रा करने के लिए। हाँ तो जैसा कि मैने कहा कि ये कोई पहली बार नहीं था, पर ये सफ़र यादगार है इसलिए आपके बीच प्रस्तुत कर रहा हूँ। वो भी इसलिए क्योंकि समय की मां...

सफ़र : तब से अब तक

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प्रणाम मित्रों,                   कहानी की भूमिका में जो कुछ लिखना था में लिख चूका हूँ. अब में चाहता हूँ कि अपने बारे में लिखू. सुधी पाठकों से एक बार फिर निवेदन है कि इसे सिर्फ एक बेतरतीब कहानी समझकर ही पढ़े. मैंने कहानी को खंडो में बाँट दिया है, ताकि पढ़ने में आसानी रहे.  टारो टारो मटोड़ो             ये शब्द उस बच्चे के हैं जिसकी उम्र अभी महज़ 3 वर्ष है. जो तुतलाते हुए बोलता है, इसलिए घर पर आने वाला हर व्यक्ति उससे एक ही सवाल करता है कि टारो टारो टई है और वो कहता है कि मटोड़ो. यह बात 1993 की है, जब मै 3 वर्ष का था. प्रमाण पत्रों के हिसाब से मैरा जन्म 1990 में हुआ. परिवार वाले कहते है कि बचपन में कुछ ज्यादा ही होशियार था (बाद में नहीं रहा) इसलिए विद्यालय में दाखिला जल्दी दिलवा दिया और वहाँ पर जो हेडमास्टर साहब ने जन्म दिनांक लिखी वही हमेशा के लिए रूढ़ हों गई. माँ पांचवी पास है और पिताजी उस समय शायद दसवीं पास रहे होंगे. परिवार में दादा-दादी से छह संताने है जिनमे सबसे बड़ी मेरी भुवा के बाद मैरे प...

स्पष्टीकरण...😎

प्रणाम मित्रों,                  इस ब्लॉग के माध्यम से मै आपको अपने जीवन से जुड़े कुछ खट्टे कुछ मीठे, कुछ रंगीन कुछ रूमानी किस्सों, और कुछ हेरतंगेज कारनामों से रूबरू करवाना चाहता हूँ. ऐसे किस्से जो हर व्यक्ति के जीवन में घटित नहीं होते. हर व्यक्ति का अपना नसीब होता है. मेरे नसीब ने मुझे जरूरत से ज्यादा ही दिया. जीवन में जिस मोड़ पर जिसकी जरूरत थी वो मिलता रहा. मेरी उम्र के 25 बसंत बीत चुके है, उम्र के इस पड़ाव पर पहुँचने तक जो यादें जुड़ी है उन्हें ही शब्दबद्ध कर रहा हूँ. आशा है इसे पढकर आप मेरे बारे में कोई राय कायम कर पायेंगे जो कि आप करेंगे ही.                 एक बात और जो मै पहले ही स्पष्ट कर देना चाहता हूँ वो यह कि यह आत्मकथा बिलकुल भी नहीं है. क्योंकि आत्मकथा महान व्यक्तियों के द्वारा लिखी जाती है, जिन्होंने अपने जीवन में कोई महान कार्य किये हों एवं जिनकी कहानी से समाज कोई प्रेरणा ले सकें. मै ना तो कोई महान व्यक्ति हूँ और ना ही मैंने अपने जीवन में कोई महान कार्य किये हैं और ना ही मेरी इस कहानी मे...

एक शुरुआत.......

प्रणाम मित्रों,                   लिखना इतना आसान नहीं हैं ,                   जितना आप समझते हैं,                   क्योंकि लिखी हुई चीज़े याद रहती है                    जबकि हर कोई भूल जाना चाहता है अतीत को                    अतीत में यादें बसती है,                    यादें अक्सर याद रहती हैं,                   मुझे भी याद है अतीत की एक याद                    जिस याद में वो बसती है                    वो...................एक याद                               ...